ब्रेकिंग न्यूज़: बनारस के चस्के ने छीना फ्रांस का ‘मिचेलिन स्टार’; दिग्गज फूड क्रिटिक ने गंगा में फेंकी अपनी रेटिंग फाइल!
वाराणसी | बनारस की गलियों में अक्सर लोग ज्ञान की तलाश में आते हैं, लेकिन इस बार एक ऐसी ‘ज्ञान प्राप्ति’ हुई है जिसने पेरिस के सात समंदर पार तक हलचल मचा दी है। फ्रांस के सबसे बड़े फूड क्रिटिक और ‘फ्लेवर एनालाइजर’ के साथ चलने वाले मिस्टर जूलियन, जो दुनिया के 5-स्टार होटलों को अपनी उंगलियों पर नचाते थे, अब अस्सी घाट पर कुल्हड़ वाली चाय और कचौड़ी के मुरीद हो गए हैं।
चांदी का चम्मच जेब में, कचौड़ी हाथ में!
जूलियन साहब जब गोदौलिया पहुँचे, तो हाइजीन और ग्लव्स की तलाश कर रहे थे। लेकिन जैसे ही हींग वाली सब्जी और कचौड़ी का पहला निवाला उनके गले के नीचे उतरा, उनके सारे ‘लॉजिक’ धुआं हो गए। जूलियन ने अपने रिसर्च नोट में लिखा:
“पेरिस में खाना पेट भरता है, बनारस में कचौड़ी का पहला निवाला ‘अहंकार’ का विसर्जन कर देता है।”
‘ठोस अवस्था में अध्यात्म’ है मलइयो
टमाटर चाट की कैलोरी गिनने आए जूलियन को जब दुकानदार ने ‘ईश्वर से मिलन’ का रास्ता दिखाया, तो उन्होंने अपनी मिचेलिन स्टार वाली फाइल गंगा जी को समर्पित कर दी। ‘मलइयो’ को चखते ही उन्होंने इसे विज्ञान की नई परिभाषा दी— “सॉलिड स्पिरिचुअलिटी”।
ईमेल से इस्तीफा: “यहाँ आत्मा डकार लेती है”
शाम होते-होते बनारसी किमाम वाले पान ने जूलियन को उस ‘शून्य’ में पहुँचा दिया, जहाँ शब्द खत्म हो जाते हैं। उन्होंने पेरिस हेड-ऑफिस को अपना आखिरी ईमेल भेजकर वापस लौटने से साफ इंकार कर दिया है। उनके ईमेल की चंद लाइनें वायरल हो रही हैं:
- “यहाँ पेट नहीं भरता, यहाँ आत्मा डकार लेती है।”
- “फ्रांस में आर्ट ऑफ कुकिंग है, बनारस में आर्ट ऑफ ईटिंग ही मोक्ष है।”
अस्सी घाट पर नया अवतार
आज सुबह मिस्टर जूलियन को अस्सी घाट पर एक पुराने कुर्ते में देखा गया। उनके हाथ में अब फ्लेवर एनालाइजर नहीं, बल्कि चाय का कुल्हड़ था। उन्होंने मीडिया से बस इतना कहा: “बाबू, ज्ञान बाद में लेना, पहले कचौड़ी चापो… मोक्ष वहीं खड़ा है।”
ब्यूरो रिपोर्ट: मोक्ष नगरी वाराणसी।
