संबल की नई शुरुआत: स्वर्गीय पंचायत सचिव के पुत्र यशवंत को मिली अनुकम्पा नियुक्ति
बेमेतरा में शासन के प्रावधानों से पीड़ित परिवार को मिला आर्थिक और सामाजिक सहारा, 3 महीने तक अनुभवी सचिव के मार्गदर्शन में चलेगी ट्रेनिंग
बेमेतरा, 9 जून 2026:
छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के नियमों के तहत बेमेतरा जिले में एक परिवार को संकट की घड़ी में बड़ा संबल मिला है। ग्राम पंचायत भनसुली के दिवंगत पंचायत सचिव स्वर्गीय गिरिध राम साहू के आश्रित पुत्र श्री यशवंत कुमार साहू को पंचायत सचिव के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की गई है। इस संवेदनशील फैसले से जहाँ पीड़ित परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिली है, वहीं पंचायत प्रशासन के कार्यों की निरंतरता भी सुनिश्चित हुई है।
असामयिक निधन के बाद शासन ने बढ़ाया मदद का हाथ
गौरतलब है कि भनसुली ग्राम पंचायत में पदस्थ पंचायत सचिव स्वर्गीय गिरिध राम साहू का बीते 30 मार्च 2026 को असामयिक निधन हो गया था। परिवार के मुखिया के अचानक चले जाने से उपजे संकट को देखते हुए शासन के निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई की गई। दिवंगत सचिव के पुत्र श्री यशवंत कुमार साहू (निवासी: ग्राम भैंसा, जिला बेमेतरा) को पंचायत सचिव के पद पर अस्थायी रूप से नियुक्त करते हुए कार्यालय जनपद पंचायत बेमेतरा से संबद्ध किया गया है।
नियुक्ति के मुख्य बिंदु:
- पद: पंचायत सचिव (अस्थायी/परिवीक्षा अवधि के अधीन)
- निर्धारित वेतनमान: ₹3500 – ₹10000 (ग्रेड वेतन: ₹1100 के न्यूनतम स्तर पर)
- संबद्ध कार्यालय: जनपद पंचायत बेमेतरा
सत्यापन और 3 महीने का व्यावहारिक प्रशिक्षण अनिवार्य
नियुक्ति आदेश के अनुसार, नवीन नियुक्त पंचायत सचिव को सेवा की शुरुआत से पहले स्वास्थ्य उपयुक्तता प्रमाण-पत्र, चरित्र सत्यापन, शैक्षणिक एवं निवास संबंधी आवश्यक दस्तावेजों का अनिवार्य सत्यापन कराना होगा।
चूंकि यह एक जिम्मेदारी भरा प्रशासनिक पद है, इसलिए शासन ने उनके कौशल विकास के लिए विशेष व्यवस्था की है। यशवंत कुमार साहू को पंचायत सचिवों के लिए निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेना होगा। इसके अतिरिक्त, कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने के लिए उन्हें प्रारंभिक तीन माह तक एक अनुभवी पंचायत सचिव के मार्गदर्शन में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
मानवीय दृष्टिकोण और प्रशासनिक निरंतरता का उदाहरण
शासन की अनुकम्पा नियुक्ति व्यवस्था का मूल उद्देश्य किसी भी शासकीय सेवक के असामयिक निधन की स्थिति में उसके आश्रित परिवार को तत्काल आर्थिक और सामाजिक सहारा देना है। बेमेतरा में हुई यह नियुक्ति इसी मानवीय दृष्टिकोण को रेखांकित करती है, जिससे न केवल एक पीड़ित परिवार का भविष्य सुरक्षित हुआ है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक कार्यों को भी गति मिलेगी।
