डिजिटल गवर्नेंस की ओर बढ़े कदम: बेमेतरा के सभी सरकारी विभागों में अब अनिवार्य रूप से लागू होगी ई-ऑफिस प्रणाली
- कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं का सख्त निर्देश: कागजी फाइलों की जगह डिजिटल माध्यम से ही होंगे सारे विभागीय पत्राचार।
- “सुशासन तिहार” और समय-सीमा (TL) के आवेदनों की समीक्षा बैठक में दिए कड़े निर्देश; लापरवाही बरतने पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही।
बेमेतरा।
प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, गति और सुगमता लाने के उद्देश्य से बेमेतरा जिले के सभी विभागों में अब ई-ऑफिस प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं ने समय-सीमा (TL) के लंबित प्रकरणों एवं ‘सुशासन तिहार’ के आवेदनों की समीक्षा बैठक में यह कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब से जिले में कोई भी विभागीय पत्राचार या फाइलों का संचालन कागजों पर नहीं, बल्कि केवल ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से ही किया जाएगा।
डिजिटल गवर्नेंस से आएगी कार्यों में पारदर्शिता और तेजी
कलेक्टर सुश्री ममगाईं ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शासन की मंशानुसार डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है। कागजी फाइलों के स्थान पर डिजिटल प्रणाली अपनाने से:
- कार्यों के निष्पादन (Disposal) में तेजी आएगी।
- फाइलों के रख-रखाव और उन्हें ढूँढने की समस्या से मुक्ति मिलेगी।
- समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
- विभिन्न विभागों के बीच समन्वय (Coordination) बेहतर होगा।
”सुशासन तिहार” के आवेदनों का हो गुणवत्तापूर्ण और स्थायी समाधान
बैठक में कलेक्टर ने “सुशासन तिहार” के तहत मिले आवेदनों की विभागवार गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि आवेदनों के निराकरण में केवल औपचारिकता या कागजी खानापूर्ति न की जाए।
”शासन की मंशा आम जनता की समस्याओं का त्वरित, प्रभावी और संवेदनशील निराकरण करना है। इसलिए आवेदनों को केवल नस्तीबद्ध (File close) करने के बजाय आवेदक की समस्या का स्थायी समाधान ढूंढें। जरूरत पड़ने पर अधिकारी खुद मौके पर जाकर जांच करें और नियमानुसार राहत पहुंचाएं।”
— सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं, कलेक्टर, बेमेतरा
लेटलतीफी पर जताई नाराजगी, लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई
कलेक्टर ने दो टूक शब्दों में कहा कि “सुशासन की पहली शर्त समयबद्धता है।” आम नागरिकों को अपने काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए सभी लंबित प्रकरणों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि:
- जवाबदेही तय होगी: बिना किसी ठोस कारण के मामलों को अटकाने या लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- संतुष्टि जरूरी है: किसी भी मामले का निराकरण केवल फाइल बंद करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाधान ऐसा हो जिससे आवेदक पूरी तरह संतुष्ट हो।
कलेक्टर ने अंत में दोहराया कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टोरेट में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में भारी कसावट आने की उम्मीद है।

