सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती आज, देशभर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
नई दिल्ली/वाराणसी: भारतीय दर्शन के दैदीप्यमान नक्षत्र, अद्वैत वेदांत के प्रणेता और सनातन धर्म को पुनर्जीवित करने वाले आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती आज पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर देशभर के मठों, मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों में विशेष पूजा-अर्चना और संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है।
सांस्कृतिक एकता के सूत्रधार
आदि गुरु शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की अल्पायु में वह कार्य कर दिखाया, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा। उन्होंने भारत की चारों दिशाओं में चार पीठों (बद्रिकाश्रम, पुरी, द्वारका और श्रृंगेरी) की स्थापना कर देश को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से एक सूत्र में पिरोया।
अद्वैत दर्शन और नव-चेतना
आज के दिन विद्वानों ने उनके ‘अद्वैत’ सिद्धांत को याद किया, जिसका मूल मंत्र है:
“ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः”
(अर्थात्: ब्रह्म ही सत्य है, जगत मिथ्या है और जीव तथा ब्रह्म में कोई भेद नहीं है।)
प्रमुख कार्यक्रम
- काशी और प्रयागराज: गंगा तट पर विशेष आरती और विद्वत सभाओं का आयोजन किया गया।
- ओंकारेश्वर: ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ (एकात्मता की प्रतिमा) पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
- डिजिटल माध्यम: सोशल मीडिया पर सुबह से ही #AdiShankaracharya ट्रेंड कर रहा है, जहाँ करोड़ों श्रद्धालु उन्हें अपनी भावांजलि अर्पित कर रहे हैं।
आदि गुरु शंकराचार्य केवल एक दार्शनिक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक क्रांति के जनक थे। उनकी शिक्षाएं आज के द्वंद्वपूर्ण समय में शांति और एकता का मार्ग प्रशस्त करती हैं। भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व उनके ज्ञान के प्रकाश से आज भी आलोकित हो रहा है।
