बस्तर में घर वापसी: 15 वर्षों बाद 27 परिवारों ने अपनी मूल आदिवासी संस्कृति को अपनाया, गाँव में छाया उत्साह
जगदलपुर (बस्तर): छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक घटनाक्रम सामने आया है। दरभा विकासखंड के ग्राम चिड़पाल में 27 आदिवासी परिवारों ने घर वापसी करते हुए अपनी मूल आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों में पुनः आस्था व्यक्त की है। ये सभी परिवार पिछले 15 वर्षों से दूसरे धर्म का पालन कर रहे थे।
पारंपरिक अनुष्ठान के साथ हुई वापसी
घर वापसी की यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक और सांस्कृतिक वातावरण में संपन्न हुई। ग्राम चिड़पाल में आयोजित इस कार्यक्रम में गाँव के मावली माता के पुजारी, गायता (पारंपरिक प्रमुख), नाईक-पाई और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। अपनी जड़ों की ओर लौटने वाले इन परिवारों का गाँव के बुजुर्गों और समुदाय के लोगों ने पारंपरिक विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ स्वागत किया।
”अपनी संस्कृति ही है असली पहचान”
घर वापसी करने वाले परिवारों ने इसे अपनी स्वेच्छा से लिया गया निर्णय बताया। इस दौरान ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखने को मिला। स्थानीय समुदायों का मानना है कि अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना आने वाली पीढ़ियों के सांस्कृतिक संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकार का संदेश
इस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ ग्रामीणों और आयोजकों ने एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि अपनी संस्कृति और जड़ों को बचाए रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा:
“अपनी संस्कृति की सुरक्षा ही आने वाली पुश्तों का भविष्य सुरक्षित करने का एकमात्र मार्ग है। धार्मिक अधिकार और पहचान तभी अक्षुण्ण रहते हैं जब हम अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हैं। भविष्य को संरक्षित करने के लिए सामुदायिक एकता और अपनी मूल आस्था के प्रति समर्पण अनिवार्य है।”
क्षेत्र में चर्चा का विषय
चिड़पाल गाँव की इस घर वापसी ने पूरे अंचल में ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर के सुदूर अंचलों में अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के प्रति बढ़ती जागरूकता इस बात का प्रमाण है कि आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर अब अधिक मुखर और सजग हो रहा है।
