भाजपा की ‘वासेपुर’ पॉलिटिक्स: जहां बड़े-बड़े सूरमा भी खबरों से हो जाते हैं रफूचक्कर!
यूपी की सियासत के एक बड़े माहिर खिलाड़ी हुआ करते थे, नरेश अग्रवाल। हरदोई जिले में नरेश अग्रवाल के परिवार का खासा दबदबा माना जाता था। जिला पंचायत, नगर पालिका से लेकर हरदोई विधानसभा तक, 40 साल तक उनका कब्ज़ा रहा है। कहने को तो वो खाँटी सपाई थे मगर प्रदेश में सरकार किसी की भी रही हो, नरेश अग्रवाल का जलवा हमेशा बरकार रहा।
अपने बयानों को लेकर नरेश अग्रवाल हमेशा अखबारों और मीडिया में चर्चा का विषय रहते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर हिंदू देवी-देवताओं तक पर वो विवादित बयान दे देते थे। उन पर हिन्दू देवी देवताओं को लेकर गलत बयानबाज़ी के चलते एफआइआर तक दर्ज हुई थी। फिर 2018 में वो भाजपा में शामिल हो गए। भक्त परेशान हो गए, जुगनू बन गए, भाजपा को गरियाने लगे।
नरेश अग्रवाल का भाजपा में शामिल होना ‘खबर’ थी, लेकिन उसके बाद नरेश अग्रवाल खबरों से गायब हो गए। किसी ने नरेश अग्रवाल का कोई बयान, कोई चर्चा या अखबार में उनकी फोटो देखी है..?? जेडीयू के एक नेता साबिर अली हुआ करते थे। कट्टरपंथी विचारों और विवादित बयानबाज़ी के लिए मशहूर थे। पीएम मोदी तो खास तौर से उनके निशाने पर रहते थे।
जब भाजपा-जेडीयू में छत्तीस का आंकड़ा था तो साबिर अली टीवी पर आकर जेडीयू की ओर से मोदी के खिलाफ ज़हर उगलते थे। साबिर अली कहते थे कि मोदी को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा। लगभग हर दूसरे दिन अखबार में उनका कोई न कोई बयान छपता था। फिर एक दिन वो बीजेपी में शामिल हो गए। भक्त परेशान, जुगनू की टिमटिम। भाजपा में भी विरोध हुआ, 24 घण्टे में साबिर अली बाहर कर दिए गए। मगर अंदरखाने भाजपा से जुड़े रहे।
पिछले साल मई में साबिर अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़ा पद मिला था। किसी को खबर हुई? एक शहज़ाद अली हुआ करते थे, एक्टिविस्ट कहलाते थे। CAA को लेकर शाहीन बाग में धरना दे रहे थे। सोशल मीडिया पर भी CAA और मोदी के खिलाफ ज़हर उगलते थे। शहज़ाद अली वामपंथियों के नए माई-बाप थे जिनसे वामियों को बड़ी क्रांति की उम्मीद थी। फिर एक दिन शहज़ाद अली भाजपा में शामिल हो गए। भक्त फिर परेशान।
शहज़ाद अली भाजपाई होते ही कहने लगे भाजपा मुस^लमा.नों की दुश्मन नहीं है। हम मोदी जी के साथ मिलकर CAA का हल निकाल लेंगे। भाजपा में शामिल होने तक तो शहज़ाद अली ‘खबर’ थे, उसके बाद एकदम से गायब हो गए। न उन्होंने CAA को लेकर अब तक कोई बयान दिया और न ही अब तक किसी ‘क्रांति’ की ‘मूली’ उखाड़ी। मुम्बई हमला आरएसएस की साज़िश बताने वाले कृपा शंकर सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए थे, भक्त तब भी परेशान थे।
कभी खबर बने रहने वाले कृपा शंकर सिंह अब खबरों से ही गायब है। कांग्रेस के धुर हिंदुत्व विरोधी अशोक चह्वाण, मिलिंद देओरा, रंजीत चौटाला, गीता कोड़ा, तपस राय, टीएमसी के अर्जुन सिंह, सुवेन्दु अधिकारी, और दिलीप मंडल भाजपा में शामिल होने के बाद या तो शांत हैं या हिंदुत्व के लिए लड़ रहे हैं। और अब राघव चड्ढा के भाजपा में आने के बाद वातावरण में जुगनुओं की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
राघव चड्ढा या तो चुप रहकर खबरों से गायब हो जाएंगे या देश और हिंदुत्व के लिए काम करेंगे। भाजपा गंगा नहीं है, जो सब पवित्तर कर देगी। भाजपा वासेपुर है..यहाँ कबूतर भी एक पंख से उड़ता है ..और दूसरे से अपनी इज्ज़त बचाता है। भाजपा में सब धान बाईस पसेरी है। भाजपा भुने चने खेत मे बोकर भी फसल तैयार कर देती है।
