नासिक TCS केस: ‘मलेशिया’ का सपना या मौत का जाल? 18 लाख का ट्रांजेक्शन और ‘इमरान’ का रहस्यमयी किरदार
नासिक: नासिक के टीसीएस (TCS) कार्यालय से शुरू हुआ विवाद अब एक अंतरराष्ट्रीय साजिश की ओर मुड़ता दिख रहा है। शिकायतकर्ता दलित महिला के हालिया खुलासों ने पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं।
दस्तावेजों की जब्ती और 12 अन्य शिकार
महिला ने बताया कि आरोपी दानिश ने न केवल उसके, बल्कि 12 अन्य लोगों के भी ओरिजिनल आधार, पासपोर्ट और मार्कशीट ‘मलेशिया में पोस्टिंग’ के नाम पर अपने पास रख लिए थे। यह सीधे तौर पर मानव तस्करी (Human Trafficking) गिरोह की कार्यप्रणाली से मेल खाता है।
इमरान और ‘दिखावे की दुनिया’
जांच में ‘इमरान’ नाम के एक नए किरदार की एंट्री हुई है। दानिश पीड़ितों को इमरान से मिलवाता था, जो उन्हें उन महिलाओं के वीडियो और प्रोफाइल दिखाता था जो कथित तौर पर मलेशिया में ‘सफल’ जीवन जी रही थीं। यह गिरोह का भरोसा जीतने का एक तरीका था।
बैंक खातों का काला खेल
सबसे चौंकाने वाला खुलासा वित्तीय धोखाधड़ी को लेकर हुआ है। दानिश और मोहसिन ने हिंदू महिलाओं के नाम पर अकाउंट खोले, लेकिन कंट्रोल (मोबाइल नंबर) अपने पास रखा। महिला के खाते से हुआ 18 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन इस बात की तस्दीक करता है कि इन मासूमों के नाम पर करोड़ों का काला खेल चल रहा था।
“शादी कभी प्लान नहीं था”
जब दानिश ने कहा कि “शादी करना कभी प्लान नहीं था,” तो साफ हो गया कि प्रेम जाल (Love Jihad) सिर्फ एक जरिया था। असली मकसद इन महिलाओं का आर्थिक शोषण, उन्हें तस्करी के दलदल में धकेलना और उनका धर्मांतरण करना था।
⚖️ आगे क्या हो सकता है?
- SIT जांच: इतने बड़े वित्तीय ट्रांजेक्शन के बाद अब इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) या आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की एंट्री हो सकती है।
- UAPA या सख्त धाराएं: यदि खातों का संबंध किसी संदिग्ध संगठन से निकलता है, तो आरोपियों पर और भी कड़ी धाराएं लग सकती हैं।
- अन्य पीड़ितों की तलाश: पुलिस अब उन 12 अन्य लोगों की तलाश कर रही है जिनके दस्तावेज दानिश के पास हैं।
दानिश का ‘प्लान’ केवल एक लड़की को धोखा देना नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध (Organized Crime) को अंजाम देना था, जिसमें पहचान की चोरी (Identity Theft), तस्करी और वित्तीय अपराध शामिल थे।
