छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर की घर-वापसी: 1982 में रायपुर से चोरी हुई बौद्ध प्रतिमा को वापस ला रही सरकार
रायपुर/सिरपुर/बेमेतरा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक इतिहास और पुरातत्व जगत के लिए एक बेहद बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। महासमुंद जिले के ऐतिहासिक बौद्ध स्थल सिरपुर से प्राप्त और करीब 43 साल पहले रायपुर के म्यूजियम से चोरी हुई भगवान अवलोकितेश्वर की बेशकीमती कांस्य प्रतिमा आखिरकार अमेरिका से भारत वापस लौट रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस दुर्लभ प्रतिमा की कीमत लगभग 19 करोड़ रुपये ($20 लाख डॉलर) आंकी गई है।
अमेरिकी सरकार द्वारा हाल ही में भारत को सौंपी गई प्राचीन कलाकृतियों में छत्तीसगढ़ की यह ऐतिहासिक धरोहर भी शामिल है। इस खबर के बाद से प्रदेश के संस्कृति प्रेमियों और पुरातत्वविदों में उत्साह का माहौल है।
रायपुर म्यूजियम से हुई थी चोरी, अमेरिका में मिली
पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 7वीं शताब्दी (उत्तर-गुप्त काल) की यह अति-दुर्लभ प्रतिमा रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई थी। वर्ष 1982 के आसपास अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह ने इसे म्यूजियम से चुरा लिया था। अवैध रास्तों से होते हुए यह प्रतिमा अमेरिका पहुंच गई, जहां इसे निजी संग्रहकर्ताओं को बेच दिया गया था। भारतीय जांच एजेंसियों और केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों के बाद आखिरकार इसे ट्रैक कर वापस हासिल कर लिया गया है।
शिल्पकार ‘द्रोणादित्य’ का नाम है दर्ज
इतिहासकारों के मुताबिक, यह प्रतिमा वर्ष 1939 में सिरपुर के प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास खुदाई के दौरान मिली थी। इस प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके पिछले हिस्से पर प्राचीन शिलालेख उत्कीर्ण है, जिसमें इसे बनाने वाले स्थानीय शिल्पकार ‘द्रोणादित्य’ का नाम दर्ज है। यह प्रतिमा सिरपुर के समृद्ध बौद्ध काल और पांडुवंशी शासनकाल की बेजोड़ धातु शिल्प कला का जीवंत उदाहरण है।
कौन हैं भगवान अवलोकितेश्वर?
महायान बौद्ध दर्शन में अवलोकितेश्वर को ‘करुणा का बोधिसत्व’ (पद्मपाणि) माना जाता है। मान्यता है कि वे संसार के सभी जीवों के कल्याण और मुक्ति के प्रतीक हैं। सिरपुर से मिली इस मूर्ति में उनकी अत्यंत सौम्य और करुणामयी मुद्रा दर्शायी गई है।
छत्तीसगढ़ लाने की तैयारी तेज, मंत्री जाएंगे दिल्ली
इस बहुमूल्य धरोहर की घर-वापसी को लेकर राज्य सरकार बेहद गंभीर है। छत्तीसगढ़ के संस्कृति व पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर इस प्रतिमा को जल्द से जल्द रायपुर सौंपने का आग्रह किया है।
मिली जानकारी के अनुसार, प्रतिमा वर्तमान में दिल्ली पहुंच रही है, जिसे लेने संस्कृति मंत्री स्वयं दिल्ली जाएंगे। दिल्ली से रायपुर लाने के बाद इस ऐतिहासिक प्रतिमा को एक बार फिर पूरे राजकीय सम्मान और पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों के बीच महंत घासीदास संग्रहालय में आम जनता के दर्शनार्थ स्थापित किया जाएगा।
