इतिहास रचते हुए: पृथिका यशिनी बनीं भारत की पहली ट्रांसजेंडर पुलिस अधिकारी
चेन्नई: भारत के सामाजिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, के. पृथिका यशिनी ने तमिलनाडु पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में कार्यभार संभालकर देश की पहली ट्रांसजेंडर पुलिस अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष की जीत है, बल्कि पूरे किन्नर समुदाय के लिए मुख्यधारा में आने का एक सशक्त मार्ग भी है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
पृथिका का सफर आसान नहीं था। सलेम की रहने वाली पृथिका को अपने लिंग परिवर्तन के फैसले के कारण परिवार और समाज के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपना घर छोड़ दिया, लेकिन अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा।
- कानूनी लड़ाई: शुरुआत में, तमिलनाडु पुलिस भर्ती बोर्ड ने उनके आवेदन को केवल ‘पुरुष’ या ‘महिला’ श्रेणी के विकल्पों के कारण खारिज कर दिया था।
- मद्रास उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप: पृथिका ने हार नहीं मानी और मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने उनके पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि “सामाजिक स्वीकार्यता उनके लिंग की पहचान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।”
भविष्य की नई किरण
अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, पृथिका अब आधिकारिक तौर पर कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनकी सफलता ने अन्य ट्रांस-व्यक्तियों के लिए सरकारी नौकरियों के दरवाजे खोल दिए हैं।
”मेरा लक्ष्य अब समाज की सेवा करना और यह साबित करना है कि अगर अवसर दिया जाए, तो हमारा समुदाय किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है।” — के. पृथिका यशिनी
मुख्य तथ्य:
- राज्य: तमिलनाडु
- पद: सब-इंस्पेक्टर (SI)
- महत्व: भारत की पहली ट्रांसजेंडर (किन्नर) पुलिस अधिकारी।
- प्रेरणा: उनके साहस ने तमिलनाडु में पुलिस भर्ती प्रक्रियाओं में ‘तीसरे लिंग’ की श्रेणी को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त किया।
