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21/03/2026

​विशेष रिपोर्ट: कहाँ गई मेरे आँगन की गौरैया?

​बेमेतरा | 20 मार्च, 2026

​कभी सुबह की पहली किरण के साथ हमारे घरों के आँगन और छतों पर चहचहाने वाली नन्ही गौरैया आज ढूँढने से भी नहीं मिल रही है। आज जब दुनिया ‘विश्व गौरैया दिवस’ (World Sparrow Day) मना रही है, तब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हमारा यह सबसे करीबी पड़ोसी हमसे दूर क्यों होता जा रहा है?

खामोश होते आँगन और बदलता परिवेश

​एक दौर था जब घर के रोशनदानों और तस्वीरों के पीछे गौरैया के घोंसले हुआ करते थे। लेकिन आधुनिक वास्तुकला ने इस नन्ही चिड़िया से उसका सिर छुपाने की जगह छीन ली है।

​”गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण के स्वास्थ्य का सूचक है। इसकी घटती संख्या इस बात का संकेत है कि हमारा शहरी पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो रहा है।” — पर्यावरण विशेषज्ञ

विलुप्ति के मुख्य कारण

​वैज्ञानिकों और पक्षी प्रेमियों के अनुसार, गौरैया की संख्या में भारी गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:

  • आधुनिक वास्तुकला: कंक्रीट के जंगलों और शीशे वाली इमारतों में गौरैया के लिए घोंसला बनाने की जगह नहीं बची है।
  • कीटनाशकों का बढ़ता प्रयोग: खेतों और बगीचों में रासायनिक कीटनाशकों के कारण गौरैया के भोजन (छोटे कीड़े-मकोड़े) खत्म हो रहे हैं।
  • मोबाइल टावर रेडिएशन: कई शोध बताते हैं कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन पक्षियों की दिशा खोजने की क्षमता और उनके अंडों को नुकसान पहुँचाता है।
  • भोजन की कमी: पहले अनाज साफ करते समय जो दाने आँगन में गिरते थे, वे अब पैकेट बंद संस्कृति के कारण गायब हो गए हैं।

क्या हम फिर से ला सकते हैं वो चहचहाहट?

​जानकारों का मानना है कि गौरैया को वापस बुलाना नामुमकिन नहीं है। छोटे-छोटे प्रयास बड़ा बदलाव ला सकते हैं:

  1. कृत्रिम घोंसले: अपने घर की बालकनी या खिड़की पर लकड़ी या गत्ते के कृत्रिम घोंसले लगाएँ।
  2. दाना-पानी: गर्मियों के मौसम में छत पर एक बर्तन में ताज़ा पानी और अनाज के दाने (जैसे बाजरा या कंगनी) जरूर रखें।
  3. देशी पौधे लगाएँ: अपनी बालकनी या बगीचे में ऐसे पौधे लगाएँ जो गौरैया को आकर्षित करें।

​गौरैया का गायब होना केवल एक पक्षी का जाना नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली से प्रकृति के जुड़ाव का खत्म होना है। आइए, इस विश्व गौरैया दिवस पर यह संकल्प लें कि हम अपने घरों में इस ‘नन्ही मेहमान’ के लिए फिर से जगह बनाएंगे।

तस्वीरें कल धुंधली थीं, कल ये यादें न बन जाएँ… लौट आओ गौरैया, मेरे आँगन की शान बन जाएँ।

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