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21/03/2026

​बिशेष ग्राउंड रिपोर्ट: चमकते नेता, सिसकता शहर – बेमेतरा की बदहाली पर ‘योगेश सिंह राजपूत’ का तीखा प्रहार

बेमेतरा। राजनीति की चकाचौंध और हकीकत के धरातल के बीच का अंतर देखना हो, तो बेमेतरा की गलियां इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। आज की हमारी खास रिपोर्ट इसी विरोधाभास पर आधारित है।

दिखावे की राजनीति vs हकीकत की मार

​नेताओं का रहन-सहन आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। नेता जी का शानदार जैकेट, आँखों पर चढ़ा ब्रांडेड चश्मा और मंच से गूंजता उनका ओजस्वी भाषण… सब कुछ ‘शानदार’ है। लेकिन जैसे ही आप मंच की चमक से दूर शहर की गलियों में कदम रखते हैं, यह ‘शानदारी’ धुंधली पड़ जाती है।

जनता हलाकान, समस्याएं बेमिसाल

योगेश सिंह राजपूत की रिपोर्टिंग के अनुसार, बेमेतरा की जनता आज बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। शहर की मुख्य समस्याओं का अंबार लगा है:

    • सड़कों का बुरा हाल: नालीयों तब्दील हो चुकी सड़कें अब हादसों को दावत दे रही हैं।
    • सफाई व्यवस्था ध्वस्त: गलियों में पसरी गंदगी और नालियों का जाम होना आम बात हो गई है।
    • पेयजल और बिजली: कई वार्डों में आज भी नियमित जलापूर्ति एक सपना बनी हुई है।

​”जब प्रतिनिधि केवल अपनी छवि चमकाने में व्यस्त हो जाएं, तो शहर की चमक फीकी पड़ना लाजमी है। बेमेतरा की आवाज अब सड़कों पर है।” — योगेश सिंह राजपूत

 

जनमत की आवाज

​आम जनता का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब केवल फोटो खिंचवाने और मंचों पर भाषण देने तक सीमित रह गए हैं। जनता पूछ रही है— “अगर सब कुछ इतना ही शानदार है, तो हमारा शहर बेहाल क्यों है?”

बदहाली की यह तस्वीर शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या बेमेतरा को केवल भाषणों से संवारा जाएगा या जमीन पर भी कोई काम होगा? यह देखना बाकी है।

बेमेतरा से ‘बेमेतरा की आवाज’ के लिए योगेश सिंह राजपूत की रिपोर्ट।

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