सेहत की संजीवनी: चैत्र में नीम की कोपलें, साल भर बीमारियों से छुट्टी!
बेमेतरा/आयुर्वेद डेस्क: भारतीय पंचांग के अनुसार चैत्र माह की शुरुआत हो चुकी है। यह केवल एक महीना नहीं, बल्कि प्रकृति के कायाकल्प का समय है। आयुर्वेद के जानकारों का मानना है कि इस दौरान शरीर में नए रक्त और नई ऊर्जा का संचार होता है। इस परिवर्तन काल में ‘नीम’ एक रक्षक की भूमिका निभाता है।
क्यों खास हैं नीम की ‘कोपलें’?
चैत्र के महीने में नीम के पेड़ पर आने वाली नई लाल-गुलाबी पत्तियां (कोपलें) औषधीय गुणों का खजाना होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन कोपलों में 300 से अधिक एक्टिव अल्कालोइड्स पाए जाते हैं।
- प्राकृतिक एंटी-बायोटिक: ये शरीर में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं का जड़ से सफाया करने में सक्षम हैं।
- रक्त शोधन: यह समय शरीर की ‘बोन मेरो’ (अस्थि मज्जा) में नए रक्त के निर्माण का होता है। नीम की कोपलें रक्त को शुद्ध कर त्वचा और स्वास्थ्य में निखार लाती हैं।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता: खाली पेट इनका सेवन करने से इम्यून सिस्टम इतना मजबूत हो जाता है कि मौसमी बीमारियां पास भी नहीं फटकतीं।
सेवन की विधि: बस कुछ दिनों का नियम
आयुर्वेद में बताया गया है कि चैत्र मास में जब तक नीम की ताजी कोपलें आती रहें, इनका सेवन करना चाहिए:
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- समय: सुबह उठते ही खाली पेट।
- मात्रा: 8 से 10 ताजी कोपलें।
- तरीका: पत्तियों को अच्छी तरह धोकर चबा-चबा कर खाएं।
विशेषज्ञ का सुझाव: “चैत्र में शरीर नए रूप में ढल रहा होता है। ऐसे में नीम का कड़वापन शरीर के भीतर की गंदगी (Toxins) को बाहर निकाल देता है। जो लोग इस महीने नियम से नीम का सेवन करते हैं, वे पूरे साल संक्रामक बीमारियों से बचे रहते हैं।”
अगर आप भी साल भर निरोगी रहना चाहते हैं, तो अपने आस-पास नीम का एक पेड़ लोकेट कर लें। एक छोटी सी सीढ़ी लगाएं या टहनियों से ताजी कोपलें तोड़ें और कल सुबह से ही इस ‘प्राकृतिक अमृत’ का लाभ उठाना शुरू करें।
यकीन मानिए, इस चैत्र की यह छोटी सी आदत आपको अगले साल फिर इस महीने का इंतज़ार करने पर मजबूर कर देगी!
