भोजशाला प्रकरण: मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, याचिका खारिज
नई दिल्ली/इंदौर | भोजशाला मुक्ति आंदोलन के कानूनी संघर्ष में आज का दिन निर्णायक साबित हुआ। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में चल रहे एएसआई (ASI) सर्वे और कानूनी कार्यवाही में अड़चनें डालने की मुस्लिम पक्ष की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा इंदौर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने आज 01 अप्रैल को खारिज कर दिया। माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि:
- विषय की सुनवाई बिल्कुल सही दिशा और न्यायपूर्ण तरीके से चल रही है।
- इस मामले की सुनवाई आगे भी माननीय इंदौर हाईकोर्ट द्वारा ही की जाएगी।
अतिक्रमण और ऐतिहासिक साक्ष्य
मामले के वादी कुलदीप तिवारी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास कोर्ट में प्रस्तुत करने के लिए कोई ठोस आधार नहीं है। ताजा एएसआई सर्वे की रिपोर्ट ने एक बार फिर पुष्ट किया है कि यह स्थान मूलतः “सरस्वती कंठाभरण” ही है।
”रुकावटें डालने से सत्य का प्रकाश नहीं छिपेगा। यह स्थान परमार वंश के राजा भोज कालीन भव्यता का दर्पण है और हजारों विद्वान आचार्यों का ज्ञान केंद्र रहा है। माता वाग्देवी का यह पवित्र मंदिर शीघ्र ही अतिक्रमण मुक्त होगा, यह हमारा संकल्प है।” — कुलदीप तिवारी (वादी, भोजशाला प्रकरण)

भोजशाला का महत्व
भोजशाला मात्र एक विवादित ढांचा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। एएसआई के हालिया सर्वेक्षणों में मिले साक्ष्यों ने हिंदू पक्ष के दावों को और अधिक मजबूती दी है, जिससे अब इस प्राचीन विद्यापीठ की मुक्ति की राह साफ होती दिख रही है।
