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05/07/2026

​जल संरक्षण से संवरेगी ग्रामीण आजीविका: बेमेतरा में मनरेगा डबरियों ने पकड़ी रफ़्तार, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

बेमेतरा, 4 जुलाई 2026: बेमेतरा जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और ‘वीबी जी राम जी’ अभियान के तहत निर्मित डबरियों (छोटे तालाबों) ने न केवल वर्षा जल का संचयन किया है, बल्कि ग्रामीणों के लिए आय के नए द्वार भी खोल दिए हैं।

​शनिवार को जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्रीमती प्रेमलता पद्माकर ने बेरला विकासखंड के ग्राम पंचायत सरदा और भटगांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत निर्मित निजी और आजीविका डबरियों के निर्माण कार्यों का सघन निरीक्षण किया।

​डबरियां: केवल जल संचय नहीं, आजीविका का सशक्त आधार

​निरीक्षण के दौरान श्रीमती पद्माकर ने कहा कि मनरेगा के तहत निर्मित ये डबरियां जल संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनका उद्देश्य केवल वर्षा का पानी रोकना नहीं है, बल्कि किसानों को सिंचाई, पशुपालन और मछलीपालन जैसे कार्यों में आत्मनिर्भर बनाना है।

  • वर्षा जल का भरपूर भराव: हाल ही में हुई अच्छी बारिश से निरीक्षण के दौरान डबरियों में पानी का पर्याप्त संचयन देखा गया, जो किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे आगामी कृषि कार्यों में सिंचाई की सुविधा तो मिलेगी ही, साथ ही भू-जल स्तर में भी सुधार होगा।
  • आजीविका के लिए प्रोत्साहन: सीईओ ने मौके पर उपस्थित हितग्राहियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे डबरियों के पानी का उपयोग मछलीपालन, व्यावसायिक सब्जी उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए करें।

​जल संरक्षण की ठोस कार्ययोजना

​सीईओ श्रीमती पद्माकर ने विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी जल संरक्षण कार्यों को निर्धारित मानकों और गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। उनकी कार्ययोजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. वृक्षारोपण को प्राथमिकता: निर्मित जल संरचनाओं के आसपास व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए गए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जल संरचनाओं की मजबूती बनी रहे।
  2. सोक पीट (सोख्ता गड्ढा) का निर्माण: जल संचयन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक घर में सोक पीट निर्माण को अनिवार्य प्राथमिकता दी गई है। यह भू-जल पुनर्भरण (Groundwater recharge) में बड़ी भूमिका निभाएगा, जिससे भविष्य में जल संकट की संभावना काफी कम हो जाएगी।
  3. सतत निगरानी: जिला पंचायत प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे ग्रामीणों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे। इसके लिए योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है।

​निरीक्षण में इनकी रही भागीदारी

​इस निरीक्षण दौरे में श्रीमती प्रेमलता पद्माकर के साथ मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बेरला सुश्री दिव्या ठाकुर, एपीओ श्री नवीन साहू और कार्यक्रम अधिकारी श्री अरविंद कश्यप प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

​प्रशासन के इस सक्रिय दृष्टिकोण से बेमेतरा जिले के ग्रामीण अंचलों में न केवल जल सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, बल्कि मनरेगा जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवार अपनी आय बढ़ाकर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन रहे हैं।

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