बेमेतरा में संतुलित खाद के उपयोग के लिए विशेष अभियान शुरू: DAP की खपत कम करने पर जोर
बेमेतरा, 12 मई 2026
छत्तीसगढ़ का बेमेतरा जिला देश के उन 100 जिलों में शामिल हो गया है जहाँ डी.ए.पी. (DAP) उर्वरक का सर्वाधिक उपयोग किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले में 31 मई से 27 जून 2026 तक “संतुलित उर्वरक उपयोग विशेष जागरूकता अभियान” चलाया जा रहा है।
जिले के आंकड़े और चिंता का विषय
वर्ष 2025 में बेमेतरा में 27,381 मीट्रिक टन डी.ए.पी. की खपत हुई, जो पूरे छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा है। मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट (2022) के अनुसार, यहाँ की जमीन में फास्फोरस और पोटाश पर्याप्त है, लेकिन नाइट्रोजन और जैविक कार्बन की कमी पाई गई है।
ग्राम लालपुर में कृषक संगोष्ठी का आयोजन
जागरूकता अभियान के तहत बेमेतरा विकासखंड के ग्राम लालपुर में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने किसानों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए:
- वैकल्पिक उर्वरकों का चुनाव: वैज्ञानिकों ने किसानों को केवल यूरिया और डी.ए.पी. पर निर्भर न रहकर SSP, NPK (12:32:16, 20:20:0:13) और नैनो यूरिया/नैनो डी.ए.पी. अपनाने की सलाह दी।
- जैविक खेती को बढ़ावा: मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए बीजामृत, जीवामृत, हरी खाद और नील हरित काई जैसे जैविक खाद के उपयोग पर जोर दिया गया।
- पर्यावरण संरक्षण: एन.आई.बी.एस.एम. रायपुर की डॉ. श्रावणी सान्याल ने बताया कि रासायनिक खादों के असंतुलित प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता गिर रही है और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
प्रमुख विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
कार्यक्रम में आईसीएआर जबलपुर के डॉ. रजनीश श्रीवास्तव और केवीके बेमेतरा के प्रमुख श्री तोषण कुमार ठाकुर ने तकनीकी सत्रों के माध्यम से किसानों की शंकाओं का समाधान किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि फसलों को पोषण देना उनकी किस्म और मिट्टी की प्रकृति पर निर्भर करता है, न कि अंधाधुंध खाद डालने पर।
विशेष: इस अभियान को राज्य सरकार के “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के साथ जोड़कर चलाया जा रहा है ताकि टिकाऊ खेती के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
कार्यक्रम में उपस्थिति
इस दौरान डॉ. रजनी डी. अगाशे, श्री डोमन सिंह टेकाम, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री वी.के. टंडन सहित विभाग के अन्य कर्मचारी और ग्राम लालपुर के 50 से अधिक प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
