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13/05/2026

​राष्ट्रवाद के अडिग स्तंभ: कौन हैं माखनलाल सरकार, जिनके पैर छूकर प्रधानमंत्री ने लिया आशीर्वाद?

नई दिल्ली/सिलिगुड़ी/बेमेतरा: राजनीति में अक्सर पद और प्रतिष्ठा की चर्चा होती है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में कुछ ऐसे नाम भी हैं जिन्होंने निस्वार्थ सेवा और विचारधारा के प्रति समर्पण की नई परिभाषा लिखी है। इन्हीं नामों में से एक हैं माखनलाल सरकार। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने की तस्वीरों ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ जेल यात्रा

​माखनलाल सरकार का नाता राष्ट्रवादी आंदोलन के उस दौर से है जब जनसंघ अपनी जड़ें जमा रहा था।

  • 1952 का कश्मीर आंदोलन: यह उनके जीवन का वो मोड़ था जिसने उनके संकल्प को फौलाद बना दिया।
  • ​डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक विधान, एक प्रधान, एक निशान’ के नारे के साथ वे कश्मीर में तिरंगा फहराने निकले।
  • ​इस दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और उन्होंने डॉ. मुखर्जी के साथ जेल की सलाखें भी साझा कीं।

संगठन के शिल्पकार: 1 साल में 10,000 सदस्य

​1980 में जब भाजपा का गठन हुआ, तब बंगाल की वामपंथी राजनीति के बीच पार्टी को खड़ा करना एक चुनौती थी। माखनलाल सरकार को पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों के संगठनात्मक समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई।

    • असाधारण रिकॉर्ड: उन्होंने अपनी कार्यकुशलता के दम पर महज एक साल के भीतर लगभग 10,000 नए सदस्यों को पार्टी से जोड़ा।
    • दीर्घकालिक नेतृत्व: उस दौर में जहाँ संगठनात्मक पदों पर कार्यकाल छोटा होता था, माखनलाल जी ने 1981 से लगातार सात वर्षों तक जिला अध्यक्ष के रूप में सेवा की। यह उनकी लोकप्रियता और संगठन पर उनकी पकड़ का प्रमाण था।

​”माखनलाल सरकार जैसे नेता भाजपा की वो नींव हैं, जिन पर आज भव्य इमारत खड़ी है। उनका जीवन सादगी और राष्ट्रवाद का जीता-जागता उदाहरण है।”

राजनीतिक विश्लेषक

 

एक भावुक पल: जब पीएम ने छुए पैर

​सार्वजनिक मंच पर प्रधानमंत्री मोदी का उनके प्रति सम्मान जताना यह संदेश देता है कि भाजपा अपने पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं के योगदान को कभी नहीं भूलती। माखनलाल सरकार आज भी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं, जो यह याद दिलाते हैं कि राजनीति केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक निरंतर चलने वाला यज्ञ है।

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