Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

17/04/2026

​शिक्षा की अनूठी मिसाल: प्राचार्य मनोज वैद्य ने ‘अमने’ स्कूल की दीवारों को बनाया ज्ञान का जीवंत केंद्र

बिलासपुर (कोटा): कहा जाता है कि एक बेहतर स्कूल केवल ईंट-पत्थरों के भवन से नहीं, बल्कि शिक्षक की कार्यशैली और उसकी दूरदृष्टि से बनता है। इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है विकास खंड कोटा के शासकीय हाई स्कूल ‘अमने’ के प्राचार्य श्री मनोज वैद्य ने। उन्होंने अपने नवाचार और ‘बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट’ की तकनीक से विद्यालय को एक ऐसे दृश्य-श्रव्य ज्ञान केंद्र में बदल दिया है, जहाँ बच्चे खेल-खेल में ही जीवन के बड़े सबक सीख रहे हैं।

संसाधन नहीं, संकल्प से सुधरा स्तर

​हाल ही में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और अन्य प्राचार्यों के दल ने अमने शाला का भ्रमण किया। इस दौरान यह बात प्रमुखता से उभर कर आई कि विद्यालय की गुणवत्ता और बच्चों के करियर निर्माण में भव्य भवन से कहीं अधिक शिक्षकों की सक्रियता और उनका विद्यार्थियों से सतत संपर्क मायने रखता है। प्राचार्य मनोज वैद्य ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रचनात्मकता से शाला के स्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।

दीवारें बोलती हैं, छतें सिखाती हैं

​शाला के प्रवेश द्वार से लेकर बरामदे, कक्षाओं और प्रयोगशालाओं तक को इस तरह सजाया गया है कि हर कोना कुछ न कुछ कहता है।

  • छत्तीसगढ़ी संस्कृति का संगम: स्कूल की दीवारों पर छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहार, पारंपरिक व्यंजन, लोक नृत्य, कला और खेलकूद के चित्रों को इतनी जीवंतता से उकेरा गया है कि छात्र अपनी जड़ों और संस्कृति से निरंतर जुड़े रहें।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: विज्ञान प्रयोगशालाओं की छतों तक पर फ्लेक्स लगाए गए हैं। जीव विज्ञान, रसायन और भौतिकी के महान वैज्ञानिकों के चित्र और उनकी उपलब्धियों को व्यवस्थित ढंग से प्रदर्शित किया गया है ताकि प्रयोग करते समय छात्रों की नज़र उन पर पड़ती रहे।
  • खेल-खेल में पर्यावरण बोध: जल, ध्वनि और पर्यावरण प्रदूषण जैसे गंभीर विषयों को ‘सांप-सीढ़ी’ के खेल के माध्यम से समझाया गया है, जो कि शिक्षा के क्षेत्र में एक अकल्पनीय प्रयोग है।

कबाड़ से जुगाड़: बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट

​प्राचार्य वैद्य की सबसे बड़ी खूबी उनकी मितव्ययिता और रचनात्मकता है। उन्होंने खराब वस्तुओं और कबाड़ का उपयोग कर विद्यालय की सजावट की है। महापुरुषों और साहित्यकारों के पोस्टर्स और चित्रों को इस क्रम में लगाया गया है कि बच्चों को उन्हें रटने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि वे हर दिन उन्हें देखकर स्थायी रूप से ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।

टीम वर्क की सफलता

​इस उत्कृष्ट सजावट और रखरखाव में श्री मनोज वैद्य ने अपने सहयोगी शिक्षकों और विद्यार्थियों को भी जोड़कर रखा है। सभी मिलकर इस शैक्षणिक वातावरण को बनाए रखने में सहयोग करते हैं। विद्यालय की इस कायाकल्प को देखकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी उनके प्रयासों की सराहना की है।

​निश्चित रूप से, शासकीय हाई स्कूल अमने आज अन्य विद्यालयों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में उभर रहा है, जहाँ शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि दीवारों और परिवेश में रची-बसी है।

बिलासपुर, से अथर्व अंगिरस की रिपोर्टिंग

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *