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01/04/2026

​कच्छ के ‘नन्हे मेहमान’ को मिली Z+ सुरक्षा: 50 जवानों का पहरा, वॉच टावर से 24×7 निगरानी

भुज/अहमदाबाद: गुजरात के कच्छ जिले से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। विलुप्त होने की कगार पर खड़े ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के एक कुनबे में नए सदस्य का आगमन हुआ है। 26 मार्च को अंडे से निकले इस नन्हे चूजे की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने ऐसी चाक-चौबंद व्यवस्था की है, जैसी आमतौर पर देश के बड़े वीवीआईपी (VVIPs) को दी जाती है।

सुरक्षा का अभेद्य किला: परिंदा भी पर न मार सके

​कच्छ के अबडासा तालुका में इस दुर्लभ पक्षी के जन्म के बाद प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। चूजे की हिफाजत के लिए 50 से अधिक वन कर्मियों की फौज तैनात की गई है। सुरक्षा के इंतजाम कुछ इस प्रकार हैं:

  • रास्ते सील: चूजे के घोंसले की ओर जाने वाले सभी रास्तों को आम लोगों और मवेशियों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
  • 24×7 मॉनिटरिंग: इलाके में विशेष वॉच टावर बनाए गए हैं, जहाँ से वन विभाग के अधिकारी स्पॉटिंग स्कोप और हाई-टेक दूरबीन के जरिए हर पल की निगरानी कर रहे हैं।
  • सीधी रिपोर्टिंग: नन्हे चूजे की सेहत और उसकी हर हरकत की लाइव रिपोर्टिंग सीधे गांधीनगर और अहमदाबाद में बैठे आला अधिकारियों को भेजी जा रही है।

इतनी कड़ी सुरक्षा क्यों?

​ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है और वर्तमान में यह अति-संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में आता है। पूरी दुनिया में इनकी संख्या अब 150 से भी कम बची है। ऐसे में प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) में एक नए चूजे का जन्म प्रजाति को बचाने की उम्मीदों को नई उड़ान देता है।

​”यह सिर्फ एक चूजा नहीं, बल्कि एक पूरी प्रजाति के अस्तित्व की उम्मीद है। हमारी टीम दिन-रात इसकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है ताकि इसे शिकारियों या किसी भी बाहरी खतरे से बचाया जा सके।”

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी

 

प्रकृति की अनमोल धरोहर

​राजस्थान का राज्य पक्षी होने के साथ-साथ, गोडावण गुजरात के कच्छ घास के मैदानों की भी पहचान है। बिजली के तारों से टकराने और आवास की कमी के कारण इनकी संख्या तेजी से घटी है। अबडासा में मिला यह नया मेहमान न केवल वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी जीत भी है।

​फिलहाल, पूरा अमला इस कोशिश में जुटा है कि यह नन्हा चूजा सुरक्षित रहे और जल्द ही आसमान की ऊंचाइयों को नापने के लिए तैयार हो जाए।

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