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22/03/2026

तीन दिन तक बर्फ में दबा रहा वीर सैनिक, रेस्क्यू के बाद डॉक्टरों ने भी नहीं बचा पाए, गांव में शोक की लहर

देश के एक वीर सैनिक की तीन दिन तक बर्फ में फंसे रहने के बाद मौत ने पूरे गांव और सेना के जवानों को गहरे सदमे में डाल दिया है। कठोर मौसम और दुर्गम परिस्थितियों में तैनाती के दौरान, जवान बर्फ की मोटी परतों में दब गया, जिसके बाद सेना ने उसे निकालने के लिए बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।हालांकि, तीन दिन की कोशिशों के बाद जब उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, यह हादसा लद्दाख क्षेत्र में ऊंचाई वाले पोस्ट पर हुआ, जहां जवान बर्फबारी के बीच ड्यूटी पर था।अचानक हुए हिमस्खलन (Avalanche) में वह अपने साथियों सहित बर्फ के नीचे दब गया। सेना की रेस्क्यू टीम ने तुरंत ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन कड़ाके की ठंड, तेज हवाएं और भारी बर्फबारी के कारण बचाव कार्य बेहद मुश्किल रहा।

रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रयास

लगातार 72 घंटे तक रेस्क्यू टीमों ने दिन-रात प्रयास किया और आखिरकार जवान को बर्फ से बाहर निकाला गया।उसे तुरंत सेना के अस्पताल में एयरलिफ्ट किया गया, लेकिन उसकी शरीर की तापमान गिरने और ऑक्सीजन की कमी के कारण हालत नाजुक थी। डॉक्टरों ने कई घंटे तक उसे बचाने की कोशिश की, मगर अंततः उसे मृत घोषित करना पड़ा।

शव पहुंचते ही गांव में मातम

जवान का शव जब उसके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था, जबकि गांव के लोग राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे ताबूत को देख कर भावुक हो उठे। सैकड़ों लोग “भारत माता की जय” और “अमर शहीद अमर रहे” के नारे लगाते हुए अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

सेना और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि

स्थानीय प्रशासन और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद जवान को पूर्ण सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।सेना की ओर से बताया गया कि जवान ने कर्तव्य निभाते हुए प्राणों की आहुति दी, और उसकी वीरता को हमेशा याद रखा जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने भी अपने बयान में कहा कि ऐसे सैनिकों के बलिदान से ही देश की सीमाएँ सुरक्षित हैं।

परिवार का दर्द और गर्व

शहीद के पिता ने कहा — “हमें गर्व है कि हमारा बेटा देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ। उसका सपना था कि वह अपने देश की रक्षा करे, और उसने अपने वचन को आखिरी सांस तक निभाया।” गांव के लोगों ने सरकार से मांग की है कि शहीद के परिवार को सम्मानजनक सहायता और सरकारी सुविधा दी जाए।

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